सनातन धर्म, अघोर साधना और मानव सेवा का दिव्य केंद्र
श्री श्री 1008 पंचदशनाम जूना त्रिजटा अघोरी अखाड़ा अघोर परम्परा, शिव साधना, गुरु-शिष्य मर्यादा और लोककल्याण के पवित्र उद्देश्य से समर्पित है।
🔱 दीक्षा एवं संस्कार 🔱
गुरु कृपा से आध्यात्मिक जीवन का आरंभ
दीक्षा सनातन एवं अघोर परंपरा में अत्यंत पवित्र आध्यात्मिक प्रक्रिया मानी जाती है। गुरु द्वारा प्रदान की गई दीक्षा साधक को साधना मार्ग, मंत्र शक्ति और आत्मिक चेतना से जोड़ती है।
दीक्षा केवल मंत्र प्राप्ति नहीं, बल्कि साधक के जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन, अनुशासन, आत्मशुद्धि और शिव-शक्ति चेतना के जागरण का मार्ग है।
अघोर परम्परा और शिव चेतना
यह अखाड़ा साधना, सेवा, अनुशासन और सनातन मूल्यों के संरक्षण हेतु समर्पित है।
संस्थापक का संदेश
सनातन धर्म की दिव्य अघोर परम्परा केवल साधना का मार्ग नहीं, बल्कि मानवता, करुणा, आत्मज्ञान और शिवत्व की अनुभूति का पवित्र पथ है।
अघोर मार्ग हमें भय, भ्रम और भेदभाव से ऊपर उठाकर सत्य, समभाव और शिव की अखण्ड चेतना का अनुभव कराता है।
अघोर एवं तंत्र साधना सेवाएँ
गुरु परम्परा और मर्यादा के अनुसार साधकों को मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
हमारे मार्गदर्शक मूल्य
साधना
आत्म-जागरण और शिव तत्व की अनुभूति।
सेवा
मानवता के प्रति निःस्वार्थ समर्पण।
अनुशासन
साधक जीवन की मर्यादा और संयम।
करुणा
हर जीव में शिव तत्व का दर्शन।
अखाड़ा नेतृत्व मंडल
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Sri Sri 1008 Paramhans Trijata Aghori
Founder
Sri Sri 1008 Paramhans Shiv Trijata Aghori
Chair Person
महंत लखन राठी
President
श्रीमहंत ओंकार पलांगे
Active President
श्री महंत कृष्ण यादव
Vice President
आचार्य महामंडलेश्वर संजय शर्मा
Vice President
करण
General Secretary
श्रीमहंत कौशलग्र मिश्र
General Secretary
महामंडलेश्वर डॉ. अभिषेक त्रिजटा अघोरी
Social Media Head, Event Incharge & Administrative Officer
महामंडलेश्वर दिनेश साही
Cashier
सेवा ही साधना है
अखाड़ा मानव सेवा, गौ सेवा, अन्न सेवा और धर्म रक्षा के कार्यों के माध्यम से समाज में करुणा, सहयोग और सनातन चेतना का प्रसार करता है।
अघोर मार्ग भय नहीं, शिवत्व की अनुभूति है
साधना, सेवा और सनातन चेतना के माध्यम से जीवन को शिवमय बनाने की यह पावन यात्रा है।
