गुरु ही शिव हैं

यह माना जाता है कि:

“गुरु ही शिव हैं और शिव ही गुरु।”

गुरु की कृपा के बिना मंत्र सिद्धि, तांत्रिक ज्ञान, कुंडलिनी जागरण और आत्म अनुभूति अपूर्ण मानी जाती है।