Guru Parampara 🔱
अघोर एवं शैव परंपरा में गुरु सर्वोच्च स्थान रखते हैं। गुरु कृपा से ही साधक शिव चेतना की अनुभूति तक पहुँचता है।
अघोर एवं शैव परंपरा में गुरु
अघोर एवं शैव मार्ग में गुरु को अत्यंत सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
गुरु ही शिव हैं
यह माना जाता है कि:
“गुरु ही शिव हैं और शिव ही गुरु।”
गुरु की कृपा के बिना मंत्र सिद्धि, तांत्रिक ज्ञान, कुंडलिनी जागरण और आत्म अनुभूति अपूर्ण मानी जाती है।
गुरु परंपरा के मूल सिद्धांत
गुरु मार्ग साधक को अनुशासन, साधना और आत्मबोध की ओर ले जाता है।
1. श्रद्धा
गुरु के प्रति पूर्ण विश्वास एवं सम्मान।
2. सेवा
गुरु सेवा को साधना का महत्वपूर्ण अंग माना गया है।
3. अनुशासन
साधक को संयमित एवं मर्यादित जीवन जीना चाहिए।
4. साधना
नियमित जप, ध्यान और तप आवश्यक है।
5. समर्पण
अहंकार त्यागकर दिव्य चेतना में समर्पित होना।
गुरु परंपरा का उद्देश्य
✔ आत्मज्ञान
✔ चेतना जागरण
✔ शिवत्व की प्राप्ति
✔ धर्म संरक्षण
✔ मानव कल्याण
✔ मोक्ष मार्ग
“गुरु कृपा के बिना अघोर मार्ग अधूरा है।”
गुरु परंपरा साधक को अज्ञान से ज्ञान, भय से निर्भयता और सीमित चेतना से शिवत्व की ओर ले जाती है।
